Thursday, January 21, 2010

गणतंत्र का मूल


हम गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारियां कर रहे हैं। राजधानी का राजपथ विकसित होते देश की झलक विश्व को दिखाने के लिए व्याकुल हो रहा है। क्षण-प्रतिक्षण बीतता समय सुखद भविष्य की कामना के साथ अतीत की स्मृतियों को भी इस अवसर पर बारंबार कुरेद रहा है। इस घड़ी में आत्मावलोकन के साथ सिहांवलोकन भी आवश्यक हो जाता है। क्योंकि बिना भूतकाल को याद किए इस बात का निर्णय करना कठिन है कि हम कहां है और बिना इस जानकारी के भविष्य के लिए सपनों की इबारत लिखना व्यर्थ है। पीछे देखें तो इस बात का गौरव संतोष पैदा करता है कि हम गुलामी की बेड़ियों को उतार स्वराज्य प्राप्त कर नव-निर्माण का इतिहास प्रतिदिन रच रहे हैं। यह मधुर अहसास, हमारे विचारों और कृत्यों को मजबूती प्रदान करता है। हम विश्व के अगzणी देशों की फेहरिस्त में सम्मिलित हो रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर हमारी विशिष्ट पहचान बन चुकी है, जिसे परिष्कृत करने का कार्य निरंतर चल रहा है। इस अतीत और वर्तमान की बुनियाद पर हम स्वर्णिम भविष्य की संकल्पना कर सकते हैं। परंतु इन आंकड़ीय तथ्यों के मध्य जब हम आत्मावलोकन करते हैं तो हमें वो चेहरे भी दिखते हैं जो दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज हैं, जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा, जो इलाज के अभाव में सिसक-सिसक कर जी रहे हैं। निश्चय ही देश ने अप्रतिम प्रगति की है, परंतु उस प्रगति का लाभ उस आम आदमी तक नहीं पहुंचा जो गांवों में रहता है। शहरी चकाचौंध को छोड़ दिया जाए तो आज भी देश के कई भागों से आम जनता के भोजन के रूप निकृष्टम पदार्थों का सेवन करने की बाते सुर्खियां बनकर हमारे सामने आती हैं। महंगाई इस वर्ष अपने चरम पर हैं। आम आदमी के लिए दो वक्त की रोटी भी जी का जंजाल बनी हुई है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी मानते हैं कि देश की 28 प्रतिशत आबादी अब भी गरीबी में जी रही है। 46 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। 50 प्रतिशत छात्रा सेंकेडरी शिक्षा से पहले ही स्कूल त्याग देते हैं। 60 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से गzस्त हैं और जब देश में प्राय: सरकारी आंकड़ों को संशय की दृष्टि से ही देखा जाता हो तो ऐसे में स्थिति को स्वयं ही समझा जा सकता है। नि:संदेह यह स्थिति अत्यंत ही चिंताजनक है। भले ही यह कह लिया जाए कि विकास की अपनी गति होती है, रातोरात चमत्कार नहीं हो सकता। परंतु स्वतंत्रता प्राप्ति के 6 दशकों का समय कम भी नहीं होता। इतनी अवधि में एक पूरी पीढ़ी बूढ़ी हो सेवानिवृत हो जाती है। यहां इन बातों को उजागर करने का आशय किसी पूर्वागzह या दुरागzह से प्रेरित होना नहीं है, बल्कि इस कमी को दूर करने की प्राथमिकता पर जोर देना है। महत्वपूर्ण यह है कि जब भी योजनाएं बनाई जाएं तो उसके केंदz में सबसे पहले उस आम देशवासी को रखा जाए तो अभावगzस्त है। साथ ही इन योजनाओं के दिशा-निर्देश इस प्रकार तय किए जाएं ताकि इनके जिन आंकलनों को आधार बनाया गया है वह कहीं पीछे न छूट जाए। गणतंत्र में गण की महत्ता को बढ़ावा मिले न कि तथ्यों के उद~घाटन को। वास्तव में गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर पर हम सबको राष्ट्र निर्माण के उन सपनों को याद कराता है जो आजादी प्राप्त करने से पूर्व देखें गए थे। अत: इस अवसर की महिमा को स्मरण रख, संकल्पित होकर सबके लिए खुशहाल भारत का निर्माण करने के हम सब एक जुट हो, यही वास्तविक गणतंत्र का मूल है।

5 comments:

Saurabh Goel said...

sahi kaha aapne...............

Saurabh Goel said...

इस अवसर की महिमा को स्मरण रख, संकल्पित होकर सबके लिए खुशहाल भारत का निर्माण करने के हम सब एक जुट हो, यही वास्तविक गणतंत्र का मूल है।

sahi kaha aapne...............

Sakshi Pradhan said...

सही बात की आपने परंतु देश के विकास में योगदान के लिए गण अर्थात आम जनता को भी आगे आना होगा। अपने अधिकारों के प्रति जब तक हम जागरूक नहीं होंगे व्यवस्था में सुधार होना संभव नहीं है।

kshama said...

वास्तव में गणतंत्र दिवस का शुभ अवसर पर हम सबको राष्ट्र निर्माण के उन सपनों को याद कराता है जो आजादी प्राप्त करने से पूर्व देखें गए थे। अत: इस अवसर की महिमा को स्मरण रख, संकल्पित होकर सबके लिए खुशहाल भारत का निर्माण करने के हम सब एक जुट हो, यही वास्तविक गणतंत्र का मूल है।

Aapke saath poorn sahmat hun...

kshama said...

Kya baat hai..iske baad koyi post nahi?