व्यंग्य
वसुधैव कुटुम्बकम~ की संकल्पना का प्रचार अवश्य ही उन लोगों ने किया होगा जो अपनों के अपनत्व से पीढ़ित रहें होंगे। संभवत: अपने दु:ख को सर्वव्यापी बनाकर, उसे घटाने के उदेश्य से ही उन्होंने यह मायाजाल रचा। अन्यथा जो मजा बिना बंधुओं-सखाओं के जीवन जीने में है, वह और कहां? यूं समझ लीजिए कि यदि आपसे किसी ने बदला लेना होगा, तो वह आपको भरे-पूरे अपनों का साथ होने की बद दुआ देगा।
क्योंकि जब आपके अपनों की संख्या बढ़ जाएगी, तो वह आपको ऐसे ही निपटा देंगे, जैसे श्यामपट पर गीला कपड़ा लिखे हुए अक्षरों को मिटा देता है।
रोजमर्रा की जिंदगी मंे आप और हम ऐसे कितने लोगों को जानते-मिलते होंेगे, जो अपनांे की कु- कृपादृष्टि प्राप्त कर, चुक गए। इसलिए इन बातों को कपोलकल्पित समझना न्यूटन के गु:त्वाकर्षण सिद्धांत का मजाक उड़ाना है। यदि आपको विश्वास नहीं होता तो आज ही अपने, अपनों में खबर फैला दें कि आपकी लाWटरी लगी है। इस सुखद सूचना को पाकर, परलोक मंे बैठे आपके अपने भी पुर्नजन्म का मोह नहीं छोड़ पाएंगे तो धरा में रहने वालों की बात ही क्या। बरसों से जिन्होंने आपको अपनी अपेक्षा के भी काबिल नहीं समझा होगा वह इस समाचार के मिलते ही आपसे इस प्रकार मिलेंगे कि श्रीराम-भरत मिलाप भी फीका पड़ेगा। उस समय आपको आदर-सत्कार और प्रेमभाव की ऐसी सरिता में स्नान करने का अवसर प्राप्त होगा कि आप गंगा स्नान की महिमा भी भूल जाएंगे। वास्तव में अपनों को अपरम्पार प्रभु ने उस समय विशुद्ध :प से गढ़ा होगा, जब धरा की सुख-शांति से देवगण कुपित हो गए होंगे। चूंकि धरा पर मानव की उत्पत्ति के समय अपनों का अस्तित्व नहीं रहा होगा, उस समय धरती भी स्वर्ग के सादृश्य रही होगी।
ऐसे में स्वर्ग में रहने वालों को धोर आपत्ति हुई होगी कि मानव तो धरा पर स्वयं में मस्त रहते हुए स्वर्ग की कामना भी नहीं करता, जबकि मानव की उत्पत्ति के समय तैयार हुए एजेंडे में इस बात का साफ उल्लेख था कि वह मानव सुख-समृद्धि की कामना के लिए महामानवों की आराधना करेगा। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ होगा तो अवश्य ही देवगण भगवान की शरण में पहुंचे होंगे, तब अपनों की रचना परमपिता को न चाहते हुए भी करनी पड़ी होगी। लंकेश्वर से लेकर अब तक असंख्यों को अपनों के हाथों लंका ढहानी पड़ी है। समाचार पत्रों में रोज ही अपनों के अपनत्त्व आधरित हिंसा की खबरें आप निश्चय ही ग्लानि से भर पढ़ते होंगे। अब आप ही विचार करें कि आप अपनी किश्ती अपनों के सहारे डुबाएंगे या फिर अकेले मस्त पिज्जा का मजा उठाएंगे।



